1. Visit: http://healthphone.org/ammaji/polio-immunization-every-time-there-is-a-polio-round.htm
    Polio Immunization: Children up to five years of age must be administered polio drops every time there is a Polio round

    Produced by: UNICEF, India - Video in हिन्दी - मानक हिन्दी - Mānak Hindī - Hindi

    Understand the importance of taking the polio vaccination every time it is offered.

    These videos focus on social and behaviour change communication and are made for individual and small group viewing, learning and discussion. They are designed to be used as interpersonal communication tools by communities and frontline workers in giving out important information to women and caregivers.

    Key Messages
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    For protection, all children must be immunized against polio, with OPV every time it is offered.

    Polio is a proven safe vaccine. There are no side effects to OPV, and it is not harmful to take it multiple times.

    Even if your child is suffering from minor ailments such as a fever, cough, cold, diarrhoea or some other illness on the day of Polio immunization, s/he should still be immunized.

    Polio immunization is a cost free service available at the Government health facilities for your child.

    Two polio drops are administered along with Routine Immunization at government health facilities and during NIDs/SNIDs for you and your child's convenience.

    Discussions and Frequently Asked Questions
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    It is safe for a sick child to be administered OPV.

    Key Response: Even if your child is suffering from minor ailments such as a fever, cough, cold, diarrhoea or some other illness on the day of Polio immunization, s/he should still be immunized.

    Polio vaccine does not make children weak.

    Key Response: Polio is a proven safe vaccine. There are no side effects to OPV, and it is not harmful to take it multiple times.

    What if I miss the polio drops or the routine immunization cycle?

    Key Response: You must resume immunization as soon as possible. Polio immunization is a cost free service available at the Government health facilities. Two polio drops are administered along with Routine Immunization at government health facilities and during NIDs/SNIDs for you and your child's convenience.

    What is the minimum number of times my child should be given Polio drops?

    Key Response: For protection, all children must be immunized against polio, with OPV every time it is offered- up to age 5.

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    # vimeo.com/72877561 Uploaded 536 Plays 0 Comments
  2. असुविधाजनक वास्तविकता यह है कि हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहां पर हर रोज एक मौन आपात स्थिति हैः आज 22,000 बच्चे ऐसे कारणों से मर जाएंगे जिन्हें रोका जा सकता था। आज 1,000 औरतें गर्भावस्था संबंधी कारणों से मर जाएंगी। इस वर्ष, 4 मिलियन नवजात शिशु अपने जीवन के पहले माह में ही मर जाएंगे।

    गरीबी, भुखमरी, आसानी से रोके जा सकने वाले रोग और बीमारियां व अन्य संबंधित कारण वे मौन हत्यारे हैं जो उनसे उनका जीवन छीन लेंगे। बच्चों की मृत्यु की संख्या का लगभग 90% केवल निम्न छः परिस्थितियों के कारण हैः जन्म संबंधी कारणों से, निमोनिया, डायरिया, मलेरिया, तथा एच.आई.वी/एड्स.

    इन हत्यारों पर केन्द्रित अगर हजारों नहीं तो सैकड़ों बेहतरीन परियोजनाएं दुनिया के शहरी और ग्रामीण हिस्सों में लागू की जाती हैं। कुछ एक गांव के स्तर पर तो कुछ अन्य, गांवों के एक समूह, एक कस्बे, एक शहर, तालुका या ब्लॉक या जिले के स्तर पर कार्य करती हैं। कुछ परियोजनाएं तो प्रदेश के स्तर पर तथा कुछ राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जाती हैं। ऐसा क्यों है? एक प्रमुख कारक क्षमता का विकास तथा स्केलिंग है।

    माँ तथा बच्चे की मृत्युदर को हम रोक पाने में कतई सक्षम नही हो पा रहे थे, उसको कम करने में स्वास्थ्य शिक्षा सबसे अधिक प्रभावी तरीकों में से एक होगी। माँ, पिता, सहोदरों, सेवा करने वालों और समुदायों के व्यवहार तथा अभ्यासों में परिवर्तन के लिये उपयोगी सूचनाएं तथा संदेश देना हमारे लिये जरूरी हैः संदेश जो बच्चों के जीवन की रक्षा कर सकते हैं तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं और उनको उनकी पूरी क्षमता तक विकसित हो कर बढने में मदद कर सकते हैं।

    अशिक्षित लोगों के लिये जानकारी का एक मात्र स्त्रोत संभवतः उनके आसपास के लोग हैं जो कई बार स्वयं भी अशिक्षित ही होते हैं। उनका दूसरों पर आश्रित होना, और स्वावलंबन, उनका अशक्त और बहिष्कृत होना, ऐसे गंभीर स्तर पर है, जिसके बारे में हममे से कई सोच भी नही सकते हैं।

    जनसंख्या में लगातार तेज वृद्धि और घटते बजटों के साथ, सरकारों के लिये कार्यक्रमों और प्रयासों को प्रभावी ढ़ंग से लागू करने हेतु अपने विभागों और कर्मचारियों की विशाल संख्या को प्रशिक्षित तथा शिक्षित करना काफी कठिन और खर्चीला होता जा रहा है। इस कारण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से परिवारों और समुदायों को रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिये जरूरी मूल ज्ञान नहीं मिल पाता है। ज्ञान के इस प्रवाह को बनाए रखने में सहायक इन संसाधनों को जितना अधिक मुक्त रखा जाएगा उतना ही अधिक बेहतर होगा।

    यात्रा का पहला पड़ाव पार करने योग्य हैः

    मोबाइल फोन ने इस तरह से संपर्कों को संभव कर दिया जाता है जिनके बारे में अभी हाल के समय तक सोचा भी नही जा सकता था। उदाहरण के लिये भारत को ही ले लीजियेः 1.17 बिलियन की जनसंख्या में 700 मिलियन(अक्टूबर 2010 तक) वायरलेस फोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या है, जो कि 15 से 20 मिलियन प्रतिमाह की दर से बढ रही है। हाल ही के एक अध्ययन के अनुसार "2014 तक मोबाइल फोन की ये पहुंच 97 प्रतिशत तक हो जाएगी"।

    क्षमता-विकास तथा स्केलिंग के लिये यह पूरा का पूरा परिदृष्य बदलने वाला माध्यम साबित होगा। इसका तात्पर्य यह है कि हम छूट गये लोगों, निरक्षरों, उन सभी औरतों और बच्चों तक पहुंच पाएंगे जो केवल दर्द भरे आंकड़ों में ही दिखते हैं। हम परिवारों तथा समुदायों तक पूरी पहुंच बना सकते हैं - एक ऐसा काम जिसे हम पहले कभी नहीं कर सके।

    सशक्तीकरण, शिक्षण, पहुंच तथा बदलते व्यवहार

    यदि तस्वीर का महत्व सौ शब्दों का है, तो वीडियो का महत्व दस लाख शब्दों का होता है

    मोबाइल फोनों को अनेक व्यवस्थाओं में संदेश भेजने में इस्तेमाल करने के लिये कई सफल परियोजनाओं का विकास किया गया है, जैसे - जांच के लिये लोगों को स्वास्थ्य केन्द्र तक आने को प्रोत्साहित करने के लिये, दवा लेना याद दिलाने के लिये तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान - स्वास्थ्यफोन समय में आगे की ओर नवीनता भरी एक छलांग है। स्वास्थ्यफोन, परिवारों को उनका व्यक्तिगत लाइब्रेरी संदर्भ और बेहतर स्वास्थ्य अभ्यासों के लिये उपयुक्त समय में, सही लोगों को, जरूरत के समय, वो भी सीधे उन तक और तब जबकि कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होने वाली हो मार्गदर्शन उपलब्ध कराते हैं।

    डायरिया
    जब किसी बच्चे को डायरिया हो, तो साधारण ओरल रीहिड्रेशन सोल्यूशन(ओ.आर.एस) को कैसे मिलाएं, इस जानकारी की एक वीडियो क्लिप बच्चे के जीवन और मृत्यु में अंतर पैदा कर सकती है। डायरिया हर साल लगभग 1.5 मिलियन बच्चों को मारता है। डायरिया के लिये सस्ता तथा प्रभावी इलाज उपलब्ध है, लेकिन विकासशील देशों में डायरिया से पीड़ित केवल 39 प्रतिशत बच्चे ही अनुशंसित इलाज प्राप्त कर पाते हैं। ओ.आर.एस. के प्रयोग ने डायरिया के कारण उत्पन्न निर्जलीकरण से हुई मृत्यु में लाखों की कमी को दर्शाया है।

    मलेरिया
    जब मलेरिया का मौसम आता है तो, मच्छरदानी के प्रयोग और बुखार से किस प्रकार निपटें, इसके बारे में बनी वीडियो क्लिप, बच्चों की मृत्यु और गर्भवती महिलाओं पैदा होने वाली जटिलताओं की रोकथाम में सहायता कर सकती है। अफ्रीका में पांच साल की उम्र से कम के बच्चों की हर साल एक मिलियन मृत्यु होती हैं, जिन्हें मच्छरदानी के उपयोग, उपयुक्त निदान और बुखार के उपचार से रोका जा सकता है। वास्तव में, अफ्रीका में मच्छर के काटने के कारण होने वाले मलेरिया संक्रमण के कारण हर 30 सेकेन्ड में एक बच्चे की मृत्यु हो जाती है।

    निमोनिया
    जब जिद्दी सर्दी और ज़ुकाम बच्चे की नींद में बाधा पैदा कर रही है तो, किस चीज की जांच करें, कैसे इलाज करें और ये सुनिश्चित करने के लिये कि निमोनिया की गंभीर समस्या न पैदा हो वीडियो की क्लिप और ऑडियो सूचना, मार्गदर्शन करेगी। हर साल पांच साल से कम उम्र के बच्चों की 1.8 मिलियन मृत्यु के कारण निमोनिया दुनिया में बच्चों की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है, इनमें से 98 प्रतिशत से अधिक मृत्यु 68 विकासशील देशों में होती है। खांसी की शुरुआत में ही अगर रोकथाम कर ली जाए तो बच्चों में निमोनिया के मामलों को कम किया जा सकता है, जिससे हर साल हो रही लाखों मौतों से बचा जा सकता है।

    कम कीमत वाले मोबाइल फोनो में पहले से डाली गयी सूचनाएं

    यूनीसेफ, डब्लू.एच.ओ., यूनेस्को, यू.एन.एफ.पी.ओ., यू.एन.डी.पी., यू.एन.एड्स, डब्लू.एफ.पी और वर्ल्ड बैंक के द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किये गये ज्ञान के आधार पर हेल्थफोन के स्वास्थ्य और पोषण की पाठ सामग्री को लिखा गया गया है। जन्म के समय को तय करने, सुरक्षित मातृत्व और नवजात के स्वास्थ्य, बाल विकास और आरंभिक जानकारी, स्तनपान, पोषण और विकास, रोग प्रतिरक्षण, डायरिया, सर्दी-ज़ुकाम व अधिक गंभीर बीमारियां, साफ-सफाई, मलेरिया, एच.आई.वी., बाल-रक्षण, चोटों से बचाव, इमरजेंसीः तैयारी और प्रतिक्रिया जैसे मुख्य चिंता के क्षेत्रों को संबोधित करता है। इस पाठ को, प्रसिद्ध मोबाइल फोनो के कम कीमत वाले मॉडलों में पहले से ही भर दिया जाएगा - न किसी सिग्नल की जरूरत होगी और न ही वीडियो या अन्य मीडिया को डाउनलोड करने की कीमत लगेगी। प्रयोग करने वालों को अपनी जरूरत के अनुसार चुनना होगा कि वह कब और क्या सुनना या देखना चाहते हैं।

    पायलट पाठ अंग्रेजी तथा अन्य 15 भारतीय भाषाओं में: हिन्दी, असमी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, राजस्थानी, संस्कृत, तमिल, तेलगू और उर्दू

    स्वास्थ्यफोन बहुत जल्दी आपके नजदीकी गांव, कस्बे, शहर, झोपड़-पट्टी, ब्लॉक, जिले, प्रदेश व प्रांत में आ रहा है!

    # vimeo.com/27713939 Uploaded 1,104 Plays 0 Comments
  3. The uncomfortable reality is that we live in a world where there is a Silent emergency every day: 22,000 children will die from preventable causes today. 1,000 women will die from pregnancy-related causes today. This year, 4 million newborns worldwide will die in the first month of life.

    The silent killers that will take away their lives are poverty, hunger, easily preventable diseases and illnesses, and related causes. Almost 90% of all child deaths are attributable to just six conditions: neonatal causes, pneumonia, diarrhoea, malaria, measles, and HIV/AIDS.

    Hundreds, if not thousands, of excellent projects, aimed at these killers, are being implemented in both rural and urban parts of the world. Some serve a village, while others serve a group of villages, a town, a city, a taluka, a block or a district. Yet few projects are implemented state-wide and even fewer nationwide. Why is that? A key factor is capacity-building and scaling-up.

    Health education has to be one of the most effective ways to reduce maternal and child mortality, those preventable deaths that we never seem to manage to prevent. We need to deliver vital messages and information for mothers, fathers, siblings, caregivers and communities to use in changing behaviour and practices: messages that can save and protect the lives of children and help them grow and develop to their full potential.

    For the illiterate, currently their only source of information is probably going to be the people around them, who are also, in many cases, illiterate. Their level of dependency and lack of self-reliance, their dis-empowerment and exclusion, is at a level that many of us will find hard to imagine.

    With the continuous rapid growth in population and shrinking budgets, governments are finding it increasingly difficult, and expensive, to effectively manage programmes and efforts that involve training and educating their large numbers of departments and staff. This is leaving health workers, and by extension, families and communities ignorant of the basic knowledge that could help prevent diseases and improve the quality of health of their families and communities. The more that resources can be freed up to facilitate the flow of knowledge directly the better.

    The First Mile Now Reachable

    The mobile phone has made connection possible in ways that were truly unthinkable until very recently. And it has stoked the desire of people to be connected. Take India for example: with a population of 1.17 billion and a wireless user base of about 700 million (Oct. 2010), and growing at the rate of 15 to 20 million a month. "Cell Phone penetration will reach 97% by 2014", according to a recent study. Soon, almost everybody will have one.

    This is a game-changer for capacity-building and scaling up. It means we can reach the excluded, the illiterate, all those women, men and children who were only visible in tragic statistics. We can reach families and communities as a whole - something we've never really been able to do before.

    Empowering, Teaching, Reaching and Changing Behaviours

    If a picture is worth a thousand words, then a video is worth a million.

    While many successful projects have been developed to use mobile phones in various settings to transmit messages -- encouraging people to come to health centres for check ups, reminders to take medication, and public health campaigns -- the HealthPhone is an innovative leap forward. HealthPhone provides families with their own personal reference library and guide to better health practices. Available in real time, right to those who need it, when they need it and when a health problem is about to strike, where they are, and as they are.

    Preloaded Content on Low-Cost Mobile Phones

    HealthPhone's health and nutrition content is scripted on knowledge prepared jointly by UNICEF, WHO, UNESCO, UNFPA, UNDP, UNAIDS, WFP and The World Bank. It addresses the main areas of concern; Timing Births, Safe Motherhood and Newborn Health, Child Development and Early Learning, Breastfeeding, Nutrition and Growth, Immunization, Diarrhoea, Coughs Colds and More Serious Illnesses, Hygiene, Malaria, HIV, Child Protection, Injury Prevention, Emergencies: preparedness and response. This content will be pre-loaded on popular low-cost models of mobile phones -- no signal is required, nor cost to download videos and other media. Users choose what they want to watch and listen to and when, wherever they happen to be.

    Pilot content in English and 15 Indian Languages: Hindi, Assamese, Bengali, Gujarati, Kannada, Konkani, Malayalam, Marathi, Oriya, Punjabi, Rajasthani, Sanskrit, Tamil Telugu and Urdu.

    HealthPhone is coming soon to a village, town, city, slum, block, district, state, province, country near you!

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    # vimeo.com/25223070 Uploaded 1,551 Plays 0 Comments
  4. Every facility providing maternity services and care for newborn infants should: Foster the establishment of breastfeeding support groups and refer mothers to them on discharge from the hospital or clinic.

    Mothers breastfeeding should be explored for their plans for infant feeding after discharge. They should also be able to describe one thing that has been recommended to ensure that they will be linked to a breastfeeding support group (if adequate support is not available in their own families) or report that the hospital will provide follow-up support on breastfeeding if needed.

    The nursing officer in charge of the maternity ward should be aware of any breastfeeding support groups in the local area and, if there are any, describe a way mothers are referred to them. Alternatively, she or he should be able to describe a system of follow-up support for all breastfeeding mothers after they are discharged (early postnatal or lactation clinic checkup, home visit, telephone call).

    After the mother is discharged from the hospital, she needs much support to breastfeed. She may have doubts if she was producing enough milk or she may have problems like engorgement or sore nipples. Hence, the tenth step recommends to either put the mother in touch with a breastfeeding support group or to help her have free access to someone in the hospital for advice as and when required.

    More info
    http://tensteps.org/step-10-successful-breastfeeding.shtml

    --.--

    Ten Steps to Successful Breastfeeding - Video Series

    Babies who are breastfed are generally healthier and achieve optimal growth and development compared to those who are fed formula milk.

    If the vast majority of babies were exclusively fed breastmilk in their first six months of life -- meaning only breastmilk and no other liquids or solids, not even water -- it is estimated that the lives of at least 1.2 million children would be saved every year. If children continue to be breastfed up to two years and beyond, the health and development of millions of children would be greatly improved.

    This video series aims to raise awareness, encourage early adoption, promote training of health care staff, and build capacity for, and to stimulate dialogue about, breastfeeding and its impact on the public, in a range of community and public contexts in low- and middle-income countries. Our goal is to have these ten steps in every facility providing maternal services and care for newborn infants.

    Videos, presentations, research, evidence, papers, training and counselling materials, tools, and many other related and supporting resources are available.

    Visit us on-line at
    http://tensteps.org
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    # vimeo.com/13509408 Uploaded 2,917 Plays 0 Comments
  5. Every facility providing maternity services and care for newborn infants should: Give no artificial teats or pacifiers (also called dummies or soothers) to breastfeeding infants.

    Infants should not be fed using bottles with artificial teats (nipples) nor allowed to suck on pacifiers.

    The ninth step rightly prohibits the use of feeding bottles and pacifiers.

    More info
    http://tensteps.org/step-9-successful-breastfeeding.shtml

    --.--

    Ten Steps to Successful Breastfeeding - Video Series

    Babies who are breastfed are generally healthier and achieve optimal growth and development compared to those who are fed formula milk.

    If the vast majority of babies were exclusively fed breastmilk in their first six months of life -- meaning only breastmilk and no other liquids or solids, not even water -- it is estimated that the lives of at least 1.2 million children would be saved every year. If children continue to be breastfed up to two years and beyond, the health and development of millions of children would be greatly improved.

    This video series aims to raise awareness, encourage early adoption, promote training of health care staff, and build capacity for, and to stimulate dialogue about, breastfeeding and its impact on the public, in a range of community and public contexts in low- and middle-income countries. Our goal is to have these ten steps in every facility providing maternal services and care for newborn infants.

    Videos, presentations, research, evidence, papers, training and counselling materials, tools, and many other related and supporting resources are available.

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MotherChild

Mother Child Trust

We employ all communications technologies to reach and transfer health and nutrition knowledge directly from and to the whole community.

Our projects deal with broad programmes involving large numbers of people, and they often cite statistics to discuss…


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We employ all communications technologies to reach and transfer health and nutrition knowledge directly from and to the whole community.

Our projects deal with broad programmes involving large numbers of people, and they often cite statistics to discuss the health concerns of these people. We wish to remember, then, that every statistic is comprised of a large number of individuals – individuals loved by their families and communities, and individuals who (or whose parents) work hard to contribute to those communities. Too many of these individuals die before having a fair chance at life while many others who live are left to lead a life forever handicapped by a childhood of hunger, illness and both physical and mental underdevelopment.

Behind all our efforts is the principle that every individual matters, that life is a precious gift and every unnecessary and avoidable death is a great tragedy and moral challenge.

We also wish to remember that health education is at its core an attempt to value life and each individual, and that a new order of health can be achieved to save these lives, which is our prime goal and purpose.

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